बेटी ने प्रेमी संग मिलकर खत्म कर दी थी पूरी फैमिली…एक साथ 7 हत्याएं, अब लगी फांसी पर रोक

अपराध

एक बेटी ने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही मां-बाप, भाई और बहनों समेत 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। मामले में कातिलों को फांसी की सजा हुई, लेकिन लड़की को जीवनदान मिल गया है।मामला रोहतक के कबूलपुर गांव में तीन छोटे बच्चों और 70 वर्षीय बुजुर्ग सहित 7 लोगों को जहर देकर मारने का है। सुप्रीम कोर्ट ने ये सातों हत्याएं करने वाली सोनम की फांसी की सजा पर शुक्रवार को रोक लगा दी। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से सोनम की अपील पर जवाब मांगा है। निचली अदालत और हाईकोर्ट ने सोनम और उसके प्रेमी नवीन को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सोनम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

14 सितंबर 2009 की रात को वारदात अंजाम दी गई थी। साल 2014 में ट्रायल कोर्ट ने सोनम और नवीन को फांसी की सजा सुनाई थी। तब दोनों ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि सोनम पर रहम नहीं किया जा सकता है। फिर दोनों ने ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच ने सजा पर स्टे लगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सोनम की अपील पर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

वारदात के समय सोनम की उम्र रही 17 साल 6 माह, सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे तथ्य
बहुचर्चित कबूलपुर कांड में फांसी की सजायाफ्ता सोनम की उम्र वारदात के समय 17 साल 6 माह थी। यह दावा बचाव पक्ष के वकील आरसी सुहाग ने किया था, लेकिन रोहतक कोर्ट व हाईकोर्ट में साबित नहीं हो पाया था। अब वकील सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से तथ्य रखकर इस बात को साबित करने का प्रयास करेंगे। मामले के अनुसार नवंबर 2009 में कबूलपुर गांव में एक ही परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई थी।
पुलिस ने परिवार की ही लड़की सोनम को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा हुआ। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक सोनम ने बताया कि वह गांव के ही युवक 22 वर्षीय नवीन से प्यार करती थी। इसकी भनक परिजनों को लग गई। दोनों ने मिलकर बाधा बन रहे परिजनों को रास्ते से हटाने का प्रयास किया। नवीन ने उसे नशीली गोलियां लाकर दी। उसने उन्हें परिजनों को खाने में मिलाकर दे दी।

रात को जब परिवार के लोग बेहोश गए तो नवीन के साथ मिलकर सोनम ने पिता 40 वर्षीय सुरेंद्र, 38 वर्षीय मां प्रोमिला, 60 वर्षीय दादी भूरा देवी, 18 वर्षीय भाई अरविंद, 8 वर्षीय चचेरे भाई विशाल, 14 वर्षीय चचेरी बहन सोनिका व 12 वर्षीय मोनिका की हत्या कर दी। वारदात को लूट के बाद हत्या का रूप लेने के लिए सोनम ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया और नवीन मौके से फरार हो गया। पुलिस ने उसके प्रेमी नवीन और दो अन्य युवक जसबीर व ओमबीर को गिरफ्तार कर लिया था।

सोनम व नवीन को फांसी की सजा, तीसरे दोषी को उम्रकैद
2014 में रोहतक की एडीजे कोर्ट ने सोनम व नवीन को फांसी की सजा सुनाई थी। जबकि तीसरे युवक जसबीर को आजीवन कारावास की सजा दी गई। चौथे आरोपी ओमबीर को बरी कर दिया गया था। अदालत ने सात लोगों की हत्या को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा था।
हाईकोर्ट ने रखी सजा बरकरार, जसबीर बरी
फांसी की सजा को बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए सोनम व नवीन को फांसी की सजा को बरकरार रखा था। जबकि जसबीर को बरी कर दिया। अब एक सप्ताह पहले सोनम ने एसपीएल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई। अब शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने फांसी की सजा पर स्टे दे दिया है।

कहां से आया नशा, अब पुलिस बताए
वारदात के बाद से सोनम व नवीन को रोहतक जेल में ही रखा गया था, लेकिन एक साल पहले विशेष कारणों के चलते नवीन को जींद जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। इतना ही नहीं, सोनम वारदात के समय नाबालिग थी, लेकिन गवाही सही न होने के कारण यह बात अदालत में साबित नहीं हो सकी थी। अब सुप्रीम कोर्ट में इन तथ्यों को रखा जाएगा। दूसरा जसबीर के बरी होने से सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर नशीला पदार्थ कहां से आया।

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